CDP All Important Theories by latestjob.news : Piaget, Vygotsky, Kohlberg | CTET 2026

Jean Piaget: Cognitive Development Theory

संज्ञानात्मक विकास का सम्पूर्ण निचोड़ (CTET & TET Special)

कौन थे जीन पियाजे?
जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के एक मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने बच्चों को “नन्हे वैज्ञानिक” (Little Scientists) कहा है। उनका मानना था कि बच्चे अपने ज्ञान का निर्माण सक्रिय रूप से खुद करते हैं, न कि बड़ों की नकल करके।

1. महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Concepts)

Schema (स्कीमा)

हमारे दिमाग में ज्ञान के छोटे-छोटे पैकेट होते हैं। जैसे बच्चे के दिमाग में ‘कुत्ते’ का स्कीमा है (4 पैर, भोंकता है)。

Adaptation (अनुकूलन)

वातावरण के साथ तालमेल बिठाना। इसके दो हिस्से हैं:

  • Assimilation (आत्मसात्करण): पुराने ज्ञान में नई जानकारी को ज्यों का त्यों जोड़ना। (उदा: काले कुत्ते को देखकर भी ‘कुत्ता’ कहना)।
  • Accommodation (समायोजन): नई जानकारी के कारण अपनी पुरानी सोच (स्कीमा) को बदलना। (उदा: बिल्ली को देखकर समझना कि यह कुत्ता नहीं है क्योंकि यह ‘म्याऊँ’ करती है)।

2. विकास की 4 अवस्थाएं (4 Stages of Development)

(i) संवेदी पेशीय अवस्था (Sensory Motor): 0-2 वर्ष

  • बच्चा अपनी ज्ञानेंद्रियों (आंख, नाक, कान, त्वचा) से सीखता है。
  • Object Permanence (वस्तु स्थायित्व): बच्चे को समझ आने लगता है कि अगर खिलौना चादर के नीचे छिपा है, तो भी वह मौजूद है。

(ii) पूर्व-संक्रियात्मक (Pre-Operational): 2-7 वर्ष

  • Animism (जीववाद): निर्जीव चीजों (गुड़िया, कुर्सी) को सजीव समझना。
  • Egocentrism (अहंकेंद्रित): “जो मुझे अच्छा लगता है, वो सबको अच्छा लगता है”。
  • Irreversibility (अपलटावी): बच्चा यह नहीं समझ पाता कि बर्फ पानी बन सकती है और पानी वापस बर्फ。

(iii) मूर्त संक्रियात्मक (Concrete Operational): 7-11 वर्ष

  • Logic (तर्क): बच्चा मूर्त (दिखने वाली) चीजों के बारे में तर्क करना शुरू कर देता है。
  • Conservation (संरक्षण): अब बच्चा समझता है कि गिलास का आकार बदलने से पानी की मात्रा नहीं बदलती。

(iv) औपचारिक संक्रियात्मक (Formal Operational): 11-15+ वर्ष

  • Abstract Thinking (अमूर्त चिंतन): बच्चा उन चीजों के बारे में भी सोच सकता है जो सामने नहीं हैं (जैसे आज़ादी, प्रेम)。
  • Deductive Reasoning: नियमों के आधार पर समस्या सुलझाना。

3. शिक्षा में महत्व (Educational Implications)

  • Curriculum: पाठ्यक्रम बच्चे की उम्र और मानसिक स्तर के अनुसार होना चाहिए।
  • Active Learning: बच्चों को खुद करके सीखने (Learning by Doing) का मौका दें。
  • Individual Differences: हर बच्चा अलग गति से सीखता है, शिक्षक को इसका सम्मान करना चाहिए。

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Lawrence Kohlberg: Moral Development Theory

कोहलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धांत (3 स्तर और 6 अवस्थाएं)

कौन थे लॉरेंस कोहलबर्ग?
लॉरेंस कोहलबर्ग एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे। उन्होंने नैतिक विकास (Moral Development) को समझने के लिए बच्चों को अलग-अलग कहानियां सुनाईं और उनसे प्रश्न पूछे।


📖 प्रसिद्ध कहानी: हेंज की दुविधा (Heinz Dilemma)
कोहलबर्ग ने ‘हेंज’ नाम के व्यक्ति की कहानी सुनाई जिसकी पत्नी बीमार थी। उसे बचाने के लिए हेंज ने दवा चोरी की। कोहलबर्ग ने बच्चों से पूछा: “क्या हेंज को चोरी करनी चाहिए थी?” इसी आधार पर उन्होंने विकास के चरण बताए।

1. महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terms)

Moral Dilemma (नैतिक दुविधा)

सही और गलत के बीच निर्णय लेने में जो संघर्ष होता है। (जैसे: दवा चोरी करूँ या पत्नी को मरने दूँ?)

Moral Reasoning (नैतिक तर्कणा)

सही या गलत का निर्णय लेने के लिए जो तर्क (Logic) हम दिमाग में लगाते हैं।

2. विकास के 3 स्तर और 6 अवस्थाएं (3 Levels & 6 Stages)

Level 1: पूर्व-परंपरागत स्तर (Pre-Conventional Level) : 4-10 वर्ष

इस स्तर पर नैतिकता बाहर से नियंत्रित होती है (माता-पिता या दंड के डर से)।

  • Stage 1: दंड एवं आज्ञापालन (Punishment & Obedience): बच्चा सजा से बचने के लिए नियमों का पालन करता है। “चोरी मत करो वरना पिटाई होगी।”
  • Stage 2: साधनात्मक सापेक्षतावादी (Instrumental Relativist): इसे “Tit for Tat” (जैसे को तैसा) भी कहते हैं। “तुम मेरी पीठ खुजाओ, मैं तुम्हारी खुजाऊंगा।” बच्चा अपने फायदे के लिए काम करता है।
Level 2: परंपरागत स्तर (Conventional Level) : 10-13 वर्ष

बच्चा समाज के नियमों और दूसरों की अपेक्षाओं को महत्वपूर्ण मानता है।

  • Stage 3: अच्छा लड़का / अच्छी लड़की (Good Boy/Good Girl): दूसरों की नजरों में अच्छा बनने के लिए व्यवहार करना। “उसने चोरी नहीं की क्योंकि वह एक अच्छा नागरिक है।”
  • Stage 4: कानून एवं व्यवस्था (Law & Order): नियमों का पालन करना सबसे जरूरी है, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो। “चोरी करना गलत है क्योंकि यह कानून के खिलाफ है।”
Level 3: उत्तर-परंपरागत स्तर (Post-Conventional Level) : 13+ वर्ष

नैतिकता खुद के सिद्धांतों पर आधारित होती है, न कि समाज के डर से।

  • Stage 5: सामाजिक अनुबंध (Social Contract): नियम लोगों की भलाई के लिए हैं, अगर नियम से किसी का नुकसान हो तो उसे बदला जा सकता है। “जान बचाना चोरी से ज्यादा जरूरी है।”
  • Stage 6: सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत (Universal Ethical Principle): यह सर्वोच्च अवस्था है। व्यक्ति अपनी अंतरात्मा (Conscience) की सुनता है, चाहे उसे अपनी जान देनी पड़े (जैसे महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला)।

3. आलोचना (Criticism by Carol Gilligan)

कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) ने कोहलबर्ग की आलोचना की क्योंकि:

  • Gender Bias (लैंगिक पूर्वाग्रह): कोहलबर्ग ने अपने प्रयोग केवल लड़कों पर किए थे।
  • Care Perspective: गिलिगन का मानना था कि महिलाएं नैतिकता में “देखभाल” (Care) को महत्व देती हैं, जबकि पुरुष “न्याय” (Justice) को।

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Lev Vygotsky: Sociocultural Theory

सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का सिद्धांत (CTET Special)

कौन थे लेव वाइगोत्स्की?
लेव वाइगोत्स्की एक रूसी मनोवैज्ञानिक थे। पियाजे के विपरीत, उनका मानना था कि बच्चे अकेले नहीं सीखते, बल्कि समाज और संस्कृति (Society & Culture) के साथ अंतःक्रिया (Interaction) करके सीखते हैं।

Key Motto: “Learning precedes Development” (सीखना विकास से पहले होता है)。

1. 3 मुख्य अवधारणाएं (3 Key Concepts)

(i) ZPD (Zone of Proximal Development)

इसे ‘समीपस्थ विकास का क्षेत्र’ कहते हैं। यह दो स्तरों के बीच का अंतर है:

  • Actual Level: जो बच्चा खुद कर सकता है।
  • Potential Level: जो बच्चा किसी की मदद से कर सकता है।

Example: बच्चा साइकिल चला तो सकता है (Potential), पर अभी उसे पीछे से पकड़ने वाले की जरूरत है। यह गैप ही ZPD है।

(ii) Scaffolding (पाड़/ढांचा)

बड़ों द्वारा दी जाने वाली अस्थाई मदद (Temporary Help)

  • यह मदद शुरुआत में ज्यादा होती है और जैसे-जैसे बच्चा सीखता है, मदद कम कर दी जाती है (Fading) .
  • Examples: इशारे करना, आधा सवाल हल करना, संकेत देना .

(iii) MKO (More Knowledgeable Other)

वह व्यक्ति जिसके पास सीखने वाले से ज्यादा ज्ञान हो। यह कोई भी हो सकता है:

  • शिक्षक, माता-पिता, या यहाँ तक कि सहपाठी (Peer) जो उस विषय में होशियार हो .
  • आजकल कंप्यूटर/AI भी MKO हो सकते हैं .

2. भाषा और विचार (Language & Thought)

वाइगोत्स्की के अनुसार, भाषा सिर्फ बात करने के लिए नहीं, बल्कि सोचने और व्यवहार को नियंत्रित (Regulate) करने के लिए भी है。

3 Types of Speech:

  1. Social Speech (0-2 वर्ष): दूसरों से बात करना。
  2. Private Speech (3-7 वर्ष): (सबसे महत्वपूर्ण) बच्चा खुद से बोल-बोल कर बातें करता है। पियाजे ने इसे ‘Egocentric’ कहा, लेकिन वाइगोत्स्की ने इसे Self-Regulation (आत्म-नियमन) का साधन माना。
  3. Inner Speech (7+ वर्ष): बाहर की आवाज़ बंद हो जाती है और मन में सोचना शुरू हो जाता है。

3. कक्षा में उपयोग (Classroom Application)

Reciprocal Teaching

शिक्षक और छात्र बारी-बारी से संवाद करते हैं (Predicting, Questioning, Clarifying, Summarizing)。

Cooperative Learning

बच्चे समूह (Groups) में काम करते हैं और एक-दूसरे से सीखते हैं (Peer Tutoring)。

Vygotsky vs Piaget (अंतर)
आधार Piaget Vygotsky
सीखने का तरीका खोज (Discovery) सहयोग (Collaboration)
भाषा vs विचार पहले विचार, फिर भाषा भाषा और विचार पहले अलग, फिर एक
विकास Development leads Learning Learning leads Development

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Noam Chomsky: Language Development Theory

भाषा विकास का जन्मजात सिद्धांत (Innatist Perspective)

कौन थे नोम चॉमस्की?
नोम चॉमस्की एक अमेरिकी भाषाविद (Linguist) हैं। उन्हें “आधुनिक भाषा विज्ञान का जनक” कहा जाता है। उन्होंने व्यवहारवादियों (जैसे B.F. Skinner) का विरोध किया और कहा कि भाषा नकल (Imitation) से नहीं, बल्कि जन्मजात क्षमता (Innate Ability) से आती है。

1. 3 मुख्य अवधारणाएं (3 Key Concepts)

(i) L.A.D (Language Acquisition Device)

चॉमस्की के अनुसार, बच्चे के मस्तिष्क में एक काल्पनिक यंत्र (Hypothetical Tool) होता है जिसे L.A.D कहते हैं。

  • यह डिवाइस 5 साल तक (Early Childhood) सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है。
  • जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है (Puberty के बाद), L.A.D कमजोर होने लगता है, इसलिए बड़ों के लिए नई भाषा सीखना मुश्किल होता है。

(ii) Universal Grammar (सार्वभौमिक व्याकरण)

दुनिया की सभी भाषाओं का एक ही मूल व्याकरण (Structure) होता है जो हमारे दिमाग में पहले से मौजूद होता है。

  • बच्चा व्याकरण के नियम (Noun, Verb, Past, Future) सीखता नहीं है, बल्कि उन्हें Generative Grammar के जरिए खुद बनाता है。
  • Example: बच्चा “I goed” बोलता है (क्योंकि उसने -ed का नियम लगा दिया), भले ही उसने यह शब्द कभी सुना न हो。

(iii) Surface Structure vs Deep Structure

भाषा के दो स्तर होते हैं:

  • Surface Structure (सतही संरचना): जो शब्द या ध्वनियाँ हम सुनते या बोलते हैं। (बच्चा शब्द बोलता है पर अर्थ नहीं जानता: मम्मी, पापा, खाना)।
  • Deep Structure (गहरी संरचना): वाक्य का असली अर्थ (Meaning)।
    Example: “राम ने खाना खाया” और “खाना राम द्वारा खाया गया” — दोनों का Surface अलग है, पर Deep Structure (अर्थ) एक ही है。

2. चॉमस्की vs स्किनर (Nativist vs Behaviorist)

आधार B.F. Skinner Noam Chomsky
सीखने का तरीका नकल (Imitation) और पुनर्बलन (Reinforcement) जन्मजात क्षमता (Innate Ability) और L.A.D
बच्चे का दिमाग कोरी स्लेट (Blank Slate) पहले से प्रोग्राम्ड (Pre-wired)
गलतियां गलतियों को सुधारा जाना चाहिए गलतियां सीखने का हिस्सा हैं (Generative)

3. कक्षा में उपयोग (Classroom Application)

  • Rich Environment: बच्चों को भाषा रटाने की जगह उन्हें समृद्ध भाषिक परिवेश (Rich Linguistic Environment) दें, L.A.D खुद काम करेगा。
  • Focus on Meaning: शिक्षक को बच्चों के व्याकरण की गलतियों पर नहीं, बल्कि उनके विचार (Deep Structure) पर ध्यान देना चाहिए।

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B.F. Skinner: Operant Conditioning Theory

क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत (R-S Theory)

कौन थे बी.एफ. स्किनर?
स्किनर एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक (American Psychologist) थे। उन्होंने थॉरनडाइक के नियमों को आगे बढ़ाया। उनका मानना था कि “परिणाम” (Consequences) ही व्यवहार को नियंत्रित करते हैं。

अन्य नाम: इसे R-S Theory (Response-Stimulus) या ‘साधनात्मक अनुबंधन’ (Instrumental Conditioning) भी कहते हैं。

1. स्किनर बॉक्स प्रयोग (The Experiment)

[Image of Skinner box diagram with rat and lever]

  • प्रयोग: स्किनर ने एक भूखे चूहे को बॉक्स में बंद किया। बॉक्स में एक लीवर था।。
  • प्रक्रिया: चूहा इधर-उधर घूमता है और गलती से लीवर दब जाता है। लीवर दबते ही उसे भोजन (Food Pellet) मिलता है।
  • निष्कर्ष: भोजन मिलने से चूहे को ‘पुनर्बलन’ (Reinforcement) मिला, जिससे उसने लीवर दबाना सीख लिया। यानी परिणाम (भोजन) ने व्यवहार (लीवर दबाना) को पक्का कर दिया

2. मुख्य शब्दावली (Key Concepts)

(i) Reinforcement (पुनर्बलन)

वह तत्व जो किसी व्यवहार के दोबारा होने की संभावना को बढ़ाता है。

  • Positive (+): कुछ अच्छा जोड़ना। (उदा: होमवर्क करने पर चॉकलेट देना)।
  • Negative (-): कुछ बुरा हटाना। (उदा: सीट बेल्ट न लगाने पर कार में जो ‘बीप-बीप’ बजती है, उसे बंद करने के लिए हम बेल्ट लगाते हैं)。

(ii) Punishment (दंड)

वह तत्व जो व्यवहार के होने की संभावना को घटाता है。

  • स्किनर का मानना था कि दंड (Punishment) व्यवहार सुधारने का अस्थाई (Temporary) तरीका है और इससे बचना चाहिए。

(iii) Shaping (आकृतिकरण)

जटिल कार्य को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर सिखाना और हर स्टेप पर तारीफ (Reinforce) करना। इसे Successive Approximation भी कहते हैं。

3. पुनर्बलन की अनुसूचियां (Schedules of Reinforcement)

Schedule Name Description Effectiveness
Fixed Ratio (FR) निश्चित संख्या में काम करने पर इनाम। (उदा: 5 सवाल हल करने पर 1 टॉफी)。 तेजी से काम होता है।
Variable Ratio (VR) कभी भी इनाम मिल सकता है। (उदा: जुआ/Gambling, लॉटरी)。 सबसे शक्तिशाली (Most Effective)। आदत आसानी से नहीं छूटती。
Fixed Interval (FI) निश्चित समय के बाद इनाम। (उदा: मासिक वेतन/Salary, हर सोमवार टेस्ट)。 कम प्रभावी। काम धीमा हो जाता है।

4. कक्षा में उपयोग (Educational Implications)

  • Programmed Learning (अभिक्रमित अनुदेशन): कंप्यूटर या मशीनों से सीखना जहाँ बच्चे को तुरंत फीडबैक (Immediate Feedback) मिलता है。
  • Reward over Punishment: स्किनर ने कहा कि दंड से केवल व्यवहार दबता है, सुधरता नहीं। इसलिए अच्छे काम पर इनाम दें।

Pavlov vs Skinner में अंतर: पावलोव (Classical) में कुत्ता निष्क्रिय (Passive) था और घंटी (S) का इंतज़ार करता था। स्किनर (Operant) में चूहा सक्रिय (Active) था और खुद लीवर (R) दबाता था。

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Ivan Pavlov: Classical Conditioning Theory

शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत (S-R Association)

कौन थे इवान पावलोव?
पावलोव एक रूसी शरीर विज्ञानी (Physiologist) थे, मनोवैज्ञानिक नहीं। उन्हें पाचन तंत्र (Digestion) पर कार्य के लिए 1904 में नोबेल पुरस्कार मिला था। उन्होंने बताया कि सीखना आदत निर्माण (Habit Formation) है जो “साहचर्य” (Association) से होता है।

1. कुत्ते पर प्रयोग (The Dog Experiment)

पावलोव ने कुत्ते की लार ग्रंथि (Salivary Gland) का ऑपरेशन किया और उसे एक घंटी के साथ भोजन देना शुरू किया। इसे 3 चरणों में समझा जा सकता है:

Step 1: Before Conditioning (अनुबंधन से पहले)

भोजन (Natural Stimulus) ➔ लार आना (Natural Response)

(कुत्ता भोजन देखकर लार टपकाता है, यह स्वाभाविक है।)

Step 2: During Conditioning (अनुबंधन के दौरान)

घंटी (Artificial) + भोजन (Natural) ➔ लार आना

(घंटी बजाई और तुरंत भोजन दिया। ऐसा कई बार दोहराया गया।)

Step 3: After Conditioning (अनुबंधन के बाद)

केवल घंटी (Artificial Stimulus) ➔ लार आना (Conditioned Response)

(अब बिना भोजन के सिर्फ घंटी की आवाज़ सुनकर कुत्ते के मुँह में लार आ गई। उसने घंटी = भोजन का संबंध जोड़ लिया।)

2. तकनीकी शब्दावली (Technical Terms)

Short Form Full Form (Hindi) Example
UCS अनअनुबंधित उद्दीपक (Natural Stimulus) भोजन (Food)
UCR अनअनुबंधित अनुक्रिया (Natural Response) लार (Saliva) – भोजन देखकर
CS अनुबंधित उद्दीपक (Artificial Stimulus) घंटी (Bell)
CR अनुबंधित अनुक्रिया (Learned Response) लार (Saliva) – घंटी सुनकर

3. सिद्धांत के मुख्य नियम (Key Principles)

1. विलोपन (Extinction): अगर घंटी बजाने के बाद बार-बार भोजन न दिया जाए, तो धीरे-धीरे लार आना बंद हो जाएगा।
2. स्वतः पुनर्लाभ (Spontaneous Recovery): विलोपन के कुछ समय बाद अगर अचानक घंटी बजाई जाए, तो कुत्ता फिर से थोड़ी लार टपका सकता है।

3. उद्दीपक सामान्यीकरण (Stimulus Generalization): मिलती-जुलती चीजों पर एक जैसा व्यवहार करना।

(उदा: बच्चा सफेद कुत्ते से डरता है, तो वह सफेद खरगोश या सफेद टेडी बियर से भी डरने लगता है।)

4. उद्दीपक विभेदन (Stimulus Discrimination): असली और नकली उद्दीपक में अंतर कर पाना।

(उदा: कुत्ता खाने वाली घंटी और स्कूल की घंटी की आवाज़ में अंतर समझ जाता है।)

4. शिक्षा में महत्व (Educational Implications)

  • आदत निर्माण (Habit Formation): अच्छी आदतें (जैसे सुबह जल्दी उठना, सफाई रखना) इसी सिद्धांत से डाली जाती हैं।
  • भय दूर करना (Removing Fear): अगर कोई बच्चा मैथ से डरता है, तो टीचर मैथ को खेल/पुरस्कार (Positive Stimulus) के साथ जोड़कर उसका डर दूर कर सकते हैं।
  • भाषा सीखना: छोटे बच्चे शब्दों को चित्रों के साथ जोड़कर (Apple का चित्र दिखाकर ‘A’ सिखाना) सीखते हैं।

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Albert Bandura: Social Learning Theory

सामाजिक अधिगम का सिद्धांत (Observational Learning)

कौन थे अल्बर्ट बंडूरा?
अल्बर्ट बंडूरा (कनाडा) का मानना था कि व्यवहार केवल पुरस्कार या दंड (Skinner) से नहीं सीखा जाता, बल्कि हम दूसरों को देखकर और उनकी नकल (Imitation) करके भी सीखते हैं। इसे Modelling (प्रतिरूपण) भी कहते हैं।

Note: बाद में उन्होंने अपने सिद्धांत का नाम बदलकर ‘Social Cognitive Theory’ (सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत) रख दिया।

1. बोबो डॉल प्रयोग (Bobo Doll Experiment)

  • प्रयोग: बंडूरा ने बच्चों को एक फिल्म दिखाई जिसमें एक वयस्क (Adult) एक बड़े प्लास्टिक के खिलौने (Bobo Doll) को मार रहा था और गालियां दे रहा था।
  • प्रतिक्रिया: फिल्म देखने के बाद जब बच्चों को उस खिलौने के साथ अकेला छोड़ा गया, तो उन्होंने भी वैसा ही हिंसक व्यवहार (Aggressive Behavior) किया।
  • निष्कर्ष: बच्चे अपने आसपास के बड़ों (Models) को देखकर व्यवहार सीखते हैं।

2. सीखने के 4 चरण (4 Steps of Modelling)

बंडूरा ने सीखने की प्रक्रिया को 4 चरणों में बाँटा है (क्रम याद रखें: ARRM):

1. अवधान (Attention):

सीखने के लिए सबसे पहले मॉडल पर ध्यान देना जरूरी है। अगर बच्चा ध्यान नहीं देगा, तो सीखेगा नहीं।

2. धारण (Retention):

देखे गए व्यवहार को अपने दिमाग में याद रखना (Memory)। जानकारी को स्टोर करना।

3. पुनः प्रस्तुतीकरण (Reproduction):

जो याद किया है, उसे करके देखना (Perform)। अभ्यास करना ताकि व्यवहार में सुधार हो सके।

4. अभिप्रेरणा (Motivation):

अगर उस व्यवहार के लिए इनाम मिलता है, तो बच्चा उसे दोहराएगा। इसे पुनर्बलन कहते हैं।

3. मुख्य शब्दावली (Key Terms)

Vicarious Learning (प्रतिनिधिक अधिगम)

दूसरों के परिणामों से सीखना।
उदा: अगर क्लास में एक बच्चे को शोर मचाने पर डांट पड़ती है, तो दूसरा बच्चा उसे देखकर खुद ही चुप हो जाता है (बिना डांट खाए)।

Self Efficacy (आत्म-प्रभावकारिता)

खुद पर विश्वास होना कि “मैं यह काम कर सकता हूँ”। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले लोग चुनौतियों से डरते नहीं हैं।

4. शिक्षा में महत्व (Educational Implications)

  • Teacher as a Role Model: शिक्षक का व्यवहार आदर्श होना चाहिए क्योंकि बच्चे उन्हें देखकर ही सीखते हैं।
  • Positive Environment: स्कूल में महापुरुषों की कहानियां सुनाना और अच्छे कामों को पुरस्कृत करना ताकि बच्चे प्रेरित हों।

Psychology Master Notes – LatestJob.News

E.L. Thorndike: Trial & Error Theory

प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत (S-R Bond Theory)

कौन थे थॉरनडाइक?
एडवर्ड एल. थॉरनडाइक अमेरिका के मनोवैज्ञानिक थे। उन्हें प्रथम शैक्षिक मनोवैज्ञानिक माना जाता है। उन्होंने अपनी किताब “Animal Intelligence” (1898) में सीखने के नियम दिए।

अन्य नाम: संबंधवाद (Connectionism), S-R Theory (Stimulus-Response), आवृत्ति का सिद्धांत (Frequency Theory)।

1. भूखी बिल्ली पर प्रयोग (The Experiment)

  • Subject: एक भूखी बिल्ली को ‘पहेली बॉक्स’ (Puzzle Box) में बंद किया गया।
  • Stimulus (उद्दीपक): बॉक्स के बाहर मछली (Dead Fish) रखी गई जिसकी खुशबू बिल्ली को लुभा रही थी।
  • Response (अनुक्रिया): बिल्ली ने बाहर निकलने के लिए कई गलत प्रयास (उछल-कूद, पंजा मारना) किए। इसे Random Movements कहते हैं।
  • Result: संयोग से बिल्ली का पंजा लीवर पर पड़ा, दरवाजा खुला और उसे खाना मिल गया। बार-बार अभ्यास करने से “गलतियां कम हो गईं” और बिल्ली ने एक बार में दरवाजा खोलना सीख लिया।

2. सीखने के मुख्य नियम (3 Primary Laws)

थॉरनडाइक ने सीखने के 3 मुख्य नियम और 5 गौण (Secondary) नियम दिए हैं। मुख्य नियम सबसे महत्वपूर्ण हैं:

(i) तत्परता का नियम (Law of Readiness)

सीखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होना जरूरी है।

Example: “आप घोड़े को तालाब तक ले जा सकते हैं, लेकिन उसे पानी पीने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।” (जब तक वह खुद तैयार न हो)।

(ii) अभ्यास का नियम (Law of Exercise)

“Practice makes a man perfect.” जिस काम को हम बार-बार करते हैं, उसे जल्दी सीखते हैं। इसके दो उप-भाग हैं:

  • उपयोग का नियम (Law of Use): दोहराने से संबंध मजबूत होते हैं।
  • अनुपयोग का नियम (Law of Disuse): अभ्यास छोड़ देने से हम भूलने लगते हैं।

(iii) प्रभाव का नियम (Law of Effect)

जिस काम को करने से संतोष (Satisfaction) मिलता है, हम उसे दोबारा करते हैं। इसे “सुख-दुःख का नियम” भी कहते हैं।

Connection: यही नियम आगे चलकर स्किनर की थ्योरी (Reinforcement) का आधार बना।

3. शिक्षा में महत्व (Educational Implications)

  • मन्दबुद्धि बालकों के लिए: यह विधि धीमी गति से सीखने वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है क्योंकि इसमें “बार-बार प्रयास” करना होता है।
  • त्रुटियां सीखने का हिस्सा हैं: शिक्षक को बच्चों की गलतियों पर गुस्सा नहीं करना चाहिए, क्योंकि गलतियों से ही अनुभव मिलता है।
  • Motivation: तत्परता के नियम के अनुसार, पढ़ाने से पहले बच्चों में रुचि जगाना जरूरी है।

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